About Me
Brief about me
Hi, I'm Ankush Walia- a Product Manager navigating the daily chaos of building and improving products. Outside of work, you'll usually find me on a badminton court, deep in discussions about football games, or adding another watch to my growing collection. I try to keep gratitude at the centre of everything I do, while continously working to understand and unravel the biases we often carry without realizing

Pen Down
Shayris/Poem
Fun Rhyming Side with some Harsh Truths
क्या चाहता है… तू बता, क्या होता है… बोल अपनी कहानी सवाल हमेशा राहें, जवाब से ज़्यादा ऐरहमत दे इस मशरूफ़ ज़माने में, और ना रहूँ मैं उलझा ऐसी हिदायत दे ना मैं बन जाऊँ जो मैं ना हूँ ऐसे तक़दीर मत लिख सफ़रनामा के वेद से, मैं ले सकूँ कोई भी एक सीख।
क्या है उस सवाल का जवाब किताब खोली तो दिखा गुलाब आँखों से देखा तो दिखा नक़ाब बोतल खोली तो नि कली शराब ये है मन का एक ख़्वाब
मलाल रह ना जाए, कर ले कुछ ऐसा काम ज़िंदगी ऐसे जी, ना हो उसका कोई दाम क़िस्मत ऐसे दे साथ कि रख सकूँ उसका मैं मान एक परिवार चाहूँ ताकि दे सकूँ उसको अपना नाम
शौहरत की कालीन पे अक्सर लोग फिसल जाते हैं आफ़ताब पाने के ज़िक्र में अक्सर लोग बिखर जाते हैं हर दौर की होती है वही पुरानी कहानी एहसास करने की जगह अक्सर लोग ज़रा सा सहमत हो जाते हैं
आम, तरबूज, संतरा — इन फलों के बारे में तो ज़रूर सुनना ह ोगा कुछ देते हैं शक्ति, तो कुछ देते हैं बुद्धि लेकिन एक फल ऐसा भी, जिसे नाप-तोल के नहीं लिया जा सकता मन में हमेशा रहता है इसका कुछ अंश लेकिन जब ज़्यादा कर ले इसको सेवन, देता है ये डान्स कौन-सा होता है ये फल, जो इन की मर्ज़ी नहीं, उसकी क़िस्मत देती है जैसा नमक डालता है स्वाद अनुसार, वैसा ये फल भी रहता है हालात अनुसार कभी रोक देता है, कभी कर देता है ये हमें आज़ाद लेकिन सवाल फिर भी वही — क्या है इस फल का राज़ कुछ लोग कहेंगे, हो गया है ये बहुत ज़रूरी है, लेकिन सुनना ना तुम कभी उनकी ये है वही कहानी, जो इन ने ख़ुद ही को सुनाई है तभी तो वो फल, जिसे कहते हैं हम — डर, जीत ना जाए ज़िंदगी से कहीं कोई भी जंग।





